SALIENT POINTS OF SPEECH: BJP NATIONAL PRESIDENT SHRI AMIT SHAH ON THE PLENARY ADDRESS OF THE HONBLE PM AT DAVOS, SWITZERLAND

Press, Share | Jan 23, 2018

Tuesday, 23 January 2018

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का आज दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम के मंच पर संबोधन ऐतिहासिक और समस्त भारतवासियों के लिये गर्व का विषय है
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प्रधानमंत्री जी का संबोधन भारत के बढ़ते क़दमों और भारत के प्रति विश्व के बदलते नजरिये का परिचायक है
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भारत संयोजन, सौहार्द और समन्वय की धरती है। हजारों वर्ष पूर्व लिखे गए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ अर्थात् सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है, की अवधारणा को आज भी आत्मसात करता है। हम जोड़ने की परंपराओं में विश्वास रखता है, विभाजन में नहीं
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भारत ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिये न केवल लक्ष्य निर्धारित किये बल्कि इस दिशा में लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई अभूतपूर्व कदम भी उठाये और यह पहल भारत ने “भूमि माता, पुत्रो अहम्पृथ्व्याः” के अपने दर्शन आधार पर अपनाया
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प्रधानमंत्री जी ने आतंकवाद के व्यापक खतरे को स्पष्ट रूप से पराजित करने के लिये समग्र विश्व से एकजुट होकर ‘गुड टेररिज्म और ‘बैड टेररिज्म’ में अंतर ख़त्म करने का आह्वान किया
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प्रधानमंत्री जी ने विश्व का आह्वान करते हुए कहा कि अगर आप वेल्थ के साथ वैलनेस चाहते हैं और हेल्थ के साथ जीवन की समग्रता चाहते हैं तो भारत में आपके लिए अद्वितीय अवसर उपलब्ध है, यदि आप समृद्धि के साथ शांति चाहते हैं तो भारत में आपका अभिनंदन है
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का आज दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम के मंच पर संबोधन ऐतिहासिक और समस्त भारतवासियों के लिये गर्व का विषय है। उन्होंने इस प्रभावी संबोधन में भारत की शक्ति, क्षमता और उसके बहु-आयामी प्रभाव को शानदार तरीके से विश्व-पटल पर रेखांकित किया है। प्रधानमंत्री जी का संबोधन भारत के बढ़ते क़दमों और भारत के प्रति विश्व के बदलते नजरिये का परिचायक है। विश्वगुरु बनने की दिशा में भारत का यह एक और सार्थक कदम है।

प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन में भारत की महान संस्कृति, मान्यताओं और दर्शन को उदधृत किया और चोटी की आर्थिक और उद्योग जगत की हस्तियों से आह्वान किया कि भारत संयोजन, सौहार्द और समन्वय की धरती है। हजारों वर्ष पूर्व लिखे गए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ अर्थात् सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है की अवधारणा को आज भी आत्मसात करता है। हम जोड़ने की परंपराओं में विश्वास रखता है, विभाजन में नहीं।

जलवायु परिवर्तन आज सम्पूर्ण विश्व के लिये एक महत्वपूर्ण चुनौती है। भारत ने इस चुनौती से निपटने के लिये न केवल लक्ष्य निर्धारित किये बल्कि इस दिशा में लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई अभूतपूर्व कदम भी उठाये। यह पहल भी भारत ने अपने दर्शन “भूमि माता, पुत्रो अहम्पृथ्व्याः” के आधार पर धरती को माता मानकर इस विषय पर संवेदनशील रुख अपनाया।

प्रधानमंत्री जी ने हर वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम के मंच पर भी दोहराया। उन्होंने आतंकवाद के व्यापक खतरे को स्पष्ट रूप से पराजित करने के लिये समग्र विश्व से एकजुट होने की अपील की ‘गुड टेररिज्म' और ‘बैड टेररिज्म' के नजरिये को ख़त्म करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री जी ने भूमंडलीकरण के खिलाफ संरक्षणवाद की नीति पर कड़ा वार करते हुए कहा कि पूरी दुनिया को इस चुनौती का सामना करना पड़ रहा है जिसका समाधान आपसी सहमति और एकजुट होकर करने से संभव होगा। उन्होंने इस विषय पर महात्मा गांधी जी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते विश्व के प्रति भारत के नजरिये को रखा।

प्रधानमंत्री जी ने विश्व का आह्वान करते हुए कहा कि अगर आप वेल्थ के साथ वैलनेस चाहते हैं और हेल्थ के साथ जीवन की समग्रता चाहते हैं तो भारत में आपके लिए अद्वितीय अवसर उपलब्ध है, यदि आप समृद्धि के साथ शांति चाहते हैं तो भारत में आपका अभिनंदन है

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