Prime Minister Shri Narendra Modi ji has decided to celebrate the 350th Martyrdom Day of Shri Guru Tegh Bahadur ji at the national level, which is a matter of good fortune for the entire India.

Press | Mar 01, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने राष्ट्रीय स्तर पर श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को मनाने का निर्णय लिया, जो पूरे भारत के लिए सौभाग्य का विषय है


अगर नौवें गुरु श्री तेगबहादुर जी हिंदू धर्म को बचाने के लिए शहादत न देते तो पूरे विश्व में एक भी हिंदू नहीं बचता

धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना शीश तक त्याग देने वाले गुरु तेग बहादुर जी युगों-युगों तक हमारी प्रेरणा रहेंगे

कश्मीरी पंडितों पर मुगल आक्रांताओं की क्रूरता के ख़िलाफ ढाल बने श्री गुरु तेग बहादुर जी

गुरुओं की सेवा करने वाले हर एक समुदाय के सेवा कार्य को प्रकाश में लाने के लिए महाराष्ट्र सरकार को बधाई देता हूँ

स्वधर्म के लिए अपने पूरे परिवार का बलिदान देने वाले ‘सरबंसदानी’ गुरु गोबिंद सिंह जी जैसा पराक्रमी इतिहास में दूसरा कोई नहीं है

‘नाम जपो, किरत करो और वंड छको' का मंत्र देकर भारत की हज़ारों साल पुरानी परंपरा को शरदे गुरु नानकदेव जी महाराज ने एक नया जीवन दिया

श्री गुरु नानकदेव जी महाराज से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी तक, सभी गुरुओं ने मुगलों की कई पीढ़ियों से धर्म को बचाने के लिए अलग-अलग समय पर अलग-अलग प्रकार से समाज को ताकत दी

दसों गुरुओं के जीवन से प्रेरणा लेकर धर्म परिवर्तन के विरुद्ध सभी देशवासियों को एकजुट होना चाहिए

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज महाराष्ट्र में गुरु श्री तेगबहादुर जी का 350वें शहीदी दिवस समागम समारोहमें गुरु साहिब की स्मृति को नमन कर उपस्थित संगत से संवाद किए। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस,उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे और श्रीमता सुनेत्रा पनार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा किप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने राष्ट्रीय स्तर पर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस को मनाने का निर्णय लिया जो पूरे भारत के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस जी ने पूरे महाराष्ट्र में गुरु तेगबहादुर जी की जीवनी को युवाओं तक पहुंचाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए। उन्होंने कहा कि अगर नौवें गुरु तेगबहादुर जी हिंदू धर्म और हिंदुओं को बचाने के लिए शहादत न देते तो पूरे विश्व में एक भी हिंदू नहीं बचता। श्री शाह ने कहा कि पूरे भारत और विश्वभर में सनातन धर्म के अनुयायी गुरु तेगबहादुर जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं कि उन्होंने हिंदू धर्म बचाने के लिए यातनाएं झेलते हुए अपनी शहादत दी।

श्री अमित शाह ने कहा कि सिख परंपरा का मूल एकता, बंधुत्व, समावेश और वीरता रहा है और गुरु ग्रंथ साहिब में इसी तत्व का समावेश किया गया है। उन्होंने कहा कि संत नामदेव जी, नरसी मेहता, कबीर जी, संत रविदास जी जैसे कई नामी संतों के पदों को गुरु ग्रंथ साहिब में जगह देने का काम दशम पिता ने किया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने कई समाज को गुरु तेगबहादुर जी के साथ जोड़ने का काम किया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि गुरु नानकदेव जी ने मानवता के 3 सरल लेकिन गहरे सिद्धांत हमें दिए हैं - नाम जपो, कीरत करो और वंड छको। इसका अर्थ है- ईश्वर के नाम का जाप करते रहिए, उनका कीर्तन करें और साथ में भोजन कीजिए। उन्होंने कहा कि यह आपसी साझेदारी को बताता है और यही परंपरा आगे जाकर लंगर और साझा चूल्हा में परिवर्तित हुई और मुगलों के सामने लड़ने की बहुत बड़ी ताकत यहां से मिली। श्री शाह ने कहा कि भारत की हज़ारों साल पुरानी परंपरा को गुरु नानकदेव जी महाराज ने एक नया जीवन देने का काम किया और गुरु तेगबहादुर जी भी इसी परंपरा के अनुयायी रहे।

श्री अमित शाह ने कहा कि गुरु तेगबहादुर जी ने हिंदू धर्म और इसके अनुयायियों की रक्षा के लिए एक पल की भी देरी नहीं की और गुरु तेगबहादुर जी ने जो कहा वो कर कर दिखाया। उन्होंने कहा कि जब कश्मीरी पंडितों पर मुश्किलें आईं तब सारे कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधि एकत्रित होकर गुरु साहब के सामने आए और संरक्षण मांगा। उन्होंने कहा कि तब से पूरी दुनिया में रहने वाले कश्मीरी पंडित गुरु साहब के साथ जुड़े हुए हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि श्री गुरु तेगबहादुर जी ने हिंदुओं और पूरे भारत पर जो उपकार किये हैं, उसे कोई नहीं भुला सकता। उन्होंने कहा कि औरंगजेब के शासन के दौरान 1675 में एक ऐसा बलिदान देखा, जिसने पूरे देश की जनता की हिम्मत तो बढ़ाईही, औरंगजेब के अत्याचार करने की ताकत को तोड़ने का काम भी किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और पंजाब में बहुत गहरा रिश्ता है और इसी भूमि को दशम पिता ने अपनी देहत्याग के लिए चुना। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं की वाणी के संत नामदेव जी की भक्ति परंपरा आज भी गुरु ग्रंथ साहिब में उपस्थित है।

श्री अमित शाह ने कहा कि गुरु तेगबहादुर जी ने देशभर के हिंदुओं और सिखों की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया और गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने खालसा पंथ की स्थापना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक हाथ में माला औऱ दूसरे हाथ में भाला लेकर औरंजगजेब के अत्याचारों के खिलाफ सिखों को संगठित कर एक बहुत बड़ी लड़ाई की शुरूआत की।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नानकदेव जी महाराज से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी तक सभी गुरूओं ने मुगलों की कई पीढ़ियों से धर्म को बचाने के लिए अलग-अलग समय पर अलग-अलग प्रकार से समाज को ताकत देने का काम किया। उन्होंने कहा कि गुरु नानकदेव जी महाराज ने ज्ञान का प्रचार प्रसार किया और कई कुरीतियों को समाप्त किया। गुरु अंगददेव जी ने शिक्षा का प्रचार प्रसार किया, गुरु अमरदास जी ने सामाजिक समरसता का प्रचार प्रसार किया, गुरु रामदास जीने अनेक संस्थान स्थापित कर एक आधार दिया, गुरु अर्जन देव जी ने सांस्कृतिक समावेशिता के लिए काम किया, गुरु हरगोविंद जी साहिब ने भक्ति और धर्म की रक्षा का दर्शन दिया। गुरु हरराय जी ने दया का भाव पूरे विश्व में प्रचारित किया, तेगबहादुर जी ने हिंद की चादर का स्वरूप पूरे विश्व के सामने रखा औऱ गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की औऱ गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश फैलाया। श्री शाह ने कहा कि सिंख पंथ के दसों गुरुओं ने एक ऐसी परंपरा बनाई है जो न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि दसों गुरुओं के जीवन से प्रेरणा लेकर धर्म परिवर्तन के विरुद्ध सभी देशवासियों को एकजुट होना चाहिए।


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