Union Home Minister and Minister of Cooperation, Shri Amit Shah, replies to the discussion in the Lok Sabha on the efforts to free the country from Left-Wing Extremism (LWE)

Press | Mar 30, 2026

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोक सभा में वामपंथी उग्रवाद (LWE) से देश को मुक्त कराने के प्रयास पर चर्चा का जवाब दिया


वामपंथी विचारधारा की उपज है नक्सलवाद

गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, नक्सलवाद के कारण गरीबी फैली

कम्युनिस्ट पार्टी अन्याय का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि हमारी संसदीय प्रणाली का विरोध करने के लिए बनी

नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब लद गए हैं

नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं बल्कि वामपंथी विचारधारा है, जिसे 1969 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए तत्कालीन सत्तारूढ़ दल की नेता ने इसे स्वीकार कर लिया था

नक्सल-मुक्त भारत मोदी सरकार की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक

जिस कम्युनिस्ट पार्टी की नींव ही दूसरे देश की विचारधारा से प्रेरित हो, वो भारत का भला कैसे करेगी?

माओवादियों ने रेड कॉरिडोर भेदभाव का विरोध करने कल इए नहीं बल्कि सरकार की पहुँच कम होने के कारण चुना था 

वामपंथी विचारधारा के समर्थकों ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद भगत सिंह या सुभाष चंद्र बोस को नहीं बल्कि “MAO” को अपना आदर्श माना

ये मोदी सरकार है जो हथियार उठायेगा उसको हिसाब देना पड़ेगा

लाल आतंक की परछाई थी इसलिए बस्तर विकास से पिछड़ गया था, लाल आतंक की परछाई हट गई, अब बस्तर विकसित हो रहा है

नक्सलमुक्त भारत मोदी सरकार के सबसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण सफलता

इसका पूरा श्रेय केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, विशेषकर कोबरा और CRPF के जवानों, राज्य पुलिस, छत्तीसगढ़ पुलिस और DRG जवानों और स्थानीय आदिवासियों को जाता है

वामपंथी उग्रवादियों ने दशकों तक जहाँ विकास नहीं पहुंचने दिया, वहां मोदी सरकार घर-घर विकास पहुंच रही है

मोदी सरकार डरने वाली नहीं बल्कि सबके साथ न्याय करने वाली सरकार है

सत्ता के समर्थन के बिना देश के बीचो-बीच, तिरुपति से लेकर पशुपतिनाथ तक, रेड कॉरिडोर संभव ही नहीं था

वामपंथी विचारधारा अपना आधार खो बैठी है इसलिए सारे वामपंथी अलग-अलग थ्योरी रच-रच कर अपने अस्तित्व को बचाने में लगे हैं

स्टेट, गवर्नेंस, संविधान और सिक्योरिटी का वैक्यूम खड़ा कर रक्तपात करना ही वामपंथी विचारधारा का उद्देश्य है, जो अब सफल नहीं होगा

नक्सलियों ने गांवों में स्कूल, दवाखाने और बैंक जला दिए, फिर लोगों को बरगला कर बोलते थे विकास नहीं पहुंचा

मैंने बहुत से बुद्धिजीवियों के आर्टिकल्स पढ़े जो नक्सलियों के मानव अधिकार की बात कर रहे थे, उनमें से एक भी आर्टिकल उस माँ के लिए नहीं था जिसके बच्चे को नक्सली जबरदस्ती उठा ले गए या उन शहीदों की विधवाओं के लिए जिनको नक्सालियों ने मारा  

वामपंथी विचारधारा का ध्रुव वाक्य "सत्यमेव जयते" नहीं बल्कि ये है कि “सत्ता बंदूक की नली से निकलती है”

नक्सलियों के साथ रहते-रहते मुख्य  विपक्षी पार्टी और उसके नेता खुद नक्सली बन गए हैं

नक्सलियों के कारण हुए नरसंहार में नक्सलियों के समर्थक भी उतने ही भागीदार हैं जितना हिंसा करने वाले हैं

मुख्य विपक्षी दल के शासनकाल में बनी NAC में भरे पड़े थे नक्सल समर्थक

सुरक्षा बलों के नक्सल विरोधी ऑपरेशन को अन्याय की लड़ाई बताने वालों को बस्तर ओलिंपिक और बस्तर पंडूम में जरुर जाना चाहिए  

चाहे नक्सलियों से मिलना हो या उनका समर्थन करना हो, मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता हमेशा नक्सलियों के साथ खड़े दिखते हैं  

एक समान्तर सरकार और न्याय व्यवस्था चला कर आदिवासियों का शोषण करने वाले नक्सली लोकतंत्र के घोर विरोधी हैं

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोक सभा में नियम 193 के अंतर्गत वामपंथी उग्रवाद (LWE) से देश को मुक्त कराने के प्रयास पर चर्चा का जवाब दिया।

चर्चा का जवाब देते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों और उनके समर्थकों ने भोले भाले आदिवासियों के सामने एक गलत प्रकार का नेरेटिव रखा गया था कि वे उनके अधिकारों और उन्हे न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है और वहां हर गांव में स्कूल बनाने और राशन की दुकान खोलने की मुहिम शुरू हो चुकी है। गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की वकाल करने वाले बताएं कि 1970 से अब तक यह सब क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 2014 में श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार आने के बाद पूरे देश के हर गरीब को घर, गैस, पीने का पानी, 5 लाख तक का बीमा, 5 किलो मुफ्त अनाज मिला, लेकिन बस्तर वाले छूट गए क्योंकि सत्य को झुठलाया गया और लाल आतंक की परछाई के कारण वहां विकास नहीं पहुंचा था। श्री शाह ने कहा कि लाल आतंक इसीलिए नहीं था कि वहां विकास नहीं था, बल्कि लाल आतंक के कारण वहां विकास नहीं हुआ था, लेकिन आज लाल आतंक की परछाई हट गई है और बस्तर विकसित हो रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि यह नरेन्द्र मोदी जी की सरकार है और जो भी हथियार उठाएगा उसे हिसाब चुकता करना पड़ेगा। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार संवेदनशील है और सभी समस्याओं को सुनना और उनका निराकरण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने योजनाएं बनाई हैं लेकिन उन पर अमल नहीं करने देंगे क्योंकि वामपंथी उग्रवादी और उनके समर्थकों की  आइडियोलॉजी यानी उनका अवैध शासन वहां चलता रहे। श्री शाह ने  कहा कि आजादी के बाद 75 साल में से 60 साल तक देश में मुख्य़ विपक्षी पार्टी का शासन रहा तब भी आदिवासी विकास से महरूम कैसे रहे। उन्होंने कहा कि विकास तो अब नरेन्द्र मोदी जी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी को अपने अंदर झांककर देखना चाहिए कि दोषी कौन है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, बंगाल, केरल, कर्नाटक के कुछ हिस्से और उत्तर प्रदेश के 3 ज़िलों सहित 12 राज्यों में  पूरा रेड कॉरिडोर बनाकर रखा था। इन क्षेत्रों में 12 करोड़ लोग सालों तक गरीबी में जीते रहे और 20,000 युवा मारे गए इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का मूल कारण विकास की मांग नहीं बल्कि एक आइडियोलॉजी है। नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं बल्कि वामपंथी विचारधारा है, जिसे 1969 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए तत्कालीन सत्तारूढ़ दल की नेता ने स्वीकार कर लिया था।

श्री अमित शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने पूरे देश के सामने स्वीकारा किया था कि कश्मीर और नॉर्थईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी समस्या हथियारबंद माओवादी हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में परिवर्तन हुआ और प्रधानमंत्री मोदी जी के शासन में कई वर्षों पुरानी समस्याओं का निराकरण हुआ, धारा 370 और 35A हट गई, राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन चुका है, GST आज वास्तविकता बन चुका है, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) बन चुका है, विधायी मंडलों में मातृशक्ति को 33% आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि आजादी के वक्त से इस देश की जनता जो कई सारे बड़े काम चाहती थी वे सभी काम नरेन्द्र मोदी जी के शासन के 12 साल में हुए और अब नक्सलवाद से मुक्त भारत की रचना भी नरेन्द्र मोदी जी के शासन के अंदर ही होगी। श्री शाह ने कहा कि पिछले 12 साल देश के लिए बहुत शुभ साबित हुए हैं। देश को गरीबी से मुक्ति दिलाने, युवाओं के लिए नई शिक्षा पद्धति लाने, आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने, देश के मूलों से न जुड़ी नीतियों को दरकिनार करने के लिए गत  12 साल में बहुत कुछ हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर सबसे अधिक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसले को देखा जाए तो निसंकोच नक्सलमुक्त भारत सबसे ऊपर होगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलमुक्त भारत जो बड़ी घटना देश में आकार लेने जा रही है, उसका पूरा श्रेय हमारे केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, विशेषकर कोबरा और सीआरपीएफ के जवानों, राज्य पुलिस, विशेषकर छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस और डीआरजी के जवानों और स्थानीय आदिवासियों को जाता है। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के समाप्त होने में जनता का भी बड़ा योगदान है।

श्री अमित शाह ने कहा कि इस विचारधारा का विकास और विकास की मांग से भी कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि यह कौन सी विचारधारा है? क्या है माओवादी विचारधारा? इसका ध्रुव वाक्य क्या है? इनका ध्रुव वाक्य है कि सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। ये विकास के लिए नहीं बल्कि अपनी आइडियोलॉजी के अस्तित्व, उसकी विजय और आइडियोलॉजी को भोले-भाले आदिवासियों में फैलाकर कर सत्ता हासिल करने के लिए है। इनका लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इनकी तुलना भगत सिंह जी और बिरसा मुंडा से कर दी। शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा, जो अंग्रेजों के सामने लड़े, उनकी तुलना आप संविधान तोड़कर हाथ में हथियार लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों लोगों के साथ कर रहे हैं? यह विचारधारा कहती है कि दीर्घकालीन युद्ध ही उनकी विचारधारा को फैला सकता है। उनको अपने लोगों  का खून बहाने से भी कोई परहेज़ नहीं है। इस विचारधारा के समर्थकों ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद भगत सिंह या सुभाष चंद्र बोस को नहीं बल्कि माओं को अपना आदर्श माना है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि सच्चाई यह है कि इन्होंने पूरे रेड कॉरिडोर को इसीलिए चुना था क्योंकि वहां राज्य की पहुंच कम थी। भोले भाले आदिवासियों को बरगलाकर उनके हाथों में हथियार पकड़ा दिए गए। उन्होंने कहा कि जो आदिवासी 15 अगस्त 1947 से पहले भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, रानी दुर्गावती, मुर्मू बंधुओं को हीरो मानकर चलता था, वह आदिवासी 1970 आते-आते माओ को अपना हीरो कैसे मानने लगा? श्री शाह ने कहा कि विकास और अन्याय के कारण नहीं बल्कि कठिन भूगोल और राज्य की अनुपस्थिति के कारण अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए वामपंथियों ने इस क्षेत्र को चुना और भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाना शुरू किया। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों ने सालों तक उस क्षेत्र में विकास को पहुंचने नहीं दिया, लेकिन अब नरेन्द्र मोदी जी के शासन में वहां घर-घर विकास पहुंच रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद के कारण इस पूरे क्षेत्र में वर्षों तक गरीबी रही। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की जड़ें गरीबी और विकास से नहीं जुड़ी बल्कि वैचारिक हैं।

श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलबाड़ी में साक्षरता का दर 32%, बस्तर में 23%, सहरसा, बिहार में 33% और बलिया, उत्तर प्रदेश में 31% था। इसी प्रकार, नक्सलबाड़ी में प्रति व्यक्ति आय ₹500, बस्तर में ₹190, सहरसा में ₹299 और बलिया में ₹374 थी। उन्होंने कहा कि चारों क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय भी एक समान थी, लेकिन नक्सलबाड़ी और बस्तर में वामपंथी उग्रवाद पनपा और सहरसा और बलिया में नहीं। ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि सहरसा और बलिया का भूगोल उनके अनुकूल नहीं था, वहां घने जंगल, नदी नाले, छुपने की पहाड़ियां नहीं थी, हथियार लेकर अपनी मूवमेंट करने, आदिवासियों को दबाने और उनको जबरदस्ती अपनी आइडियोलॉजी के साथ जोड़ने की अनुकूलता नहीं थी। उन्होंने कहा कि अगर विकास ही पैमाना होता, अगर प्रति व्यक्ति आय ही पैमाना होता, तो देश के बहुत सारे हिस्से ऐसे थे जहां 1970 में विकास नहीं पहुंचा था, लेकिन वहाँ नक्सलवाद क्यों नहीं फैला?

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ये डरने वाली नहीं बल्कि सबके साथ न्याय करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत नक्सलबाड़ी और बंगाल से हुई। 1971 के एक ही वर्ष में वहां 3620 हिंसा की घटनाएं हुई थीं,1980 का दशक आते-आते पीपल्स वॉर ग्रुप बन गया और फिर यह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा राज्यों में फैला। 1990 के दशक में वामपंथी विचारधारा सिकुड़ती गई और यहां पर भी उग्रवादी गुटों और वामपंथी पार्टियों में विलय शुरू हुआ। 2004 में दो प्रमुख गुट मिल गए और सीपीआई माओवादी का गठन किया। 1970 से 2004 के कालखंड में चार साल छोड़कर पूरा समय मुख्य विपक्षी पार्टी का शासन रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि यही समय है जब नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ ये आंदोलन 12 राज्यों, देश के 17% भूभाग और 10% से ज्यादा आबादी में पहुंच गया। उन्होंने कहा कि सत्ता के समर्थन के बगैर देश के बीचो-बीच, तिरुपति से लेकर पशुपतिनाथ तक, रेड कॉरिडोर संभव ही नहीं था। उन्होंने कहा कि जो हथियार पकड़े गए हैं, उसमें से 92% हथियार पुलिस से लूटे हुए थे। थाने लूट लिए गए, गोलियां लूट ली गई और उनका उपयोग निर्दोष जवानों, बच्चों, कृषकों को मारने के लिए किया गया। वामपंथी विचारधारा ने इसे एक भ्रांति की तरह प्रोपेगेंडा के माध्यम से अपनी विचारधारा को टिकाने के लिए फैलाया कि अन्याय से बचने के लिए हथियार हाथ में उठाए।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है कि किसी भी समस्या का समाधान बहस से निकल सकता है, हथियारों से नहीं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने इस देश में वैक्यूम खड़ा करने का प्रयास किया, स्टेट का वैक्यूम, सारी व्यवस्थाएं नष्ट कर गवर्नेंस का वैक्यूम, संविधान से श्रद्धा खत्म कर संविधान का वैक्यूम और पुलिस थानों को जलाकर सिक्योरिटी वैक्यूम खड़ा करने का प्रयास किया है। गृह मंत्री ने कहा कि माओवादी और नक्सली  हिंसा करने वालों के दिन अब लद गए हैं और मोदी सरकार में ये लंबे समय नहीं चलेगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि माओवादी उग्रवादियों को अन्याय के खिलाफ हथियारों की लड़ाई लडने वालों की तरह मानने की गलती नहीं करनी चाहिए क्योंकि वामपंथी विचारधारा अपना आधार खो बैठी है इसलिए सारे वामपंथी अलग-अलग थ्योरी रच-रच कर अपने अस्तित्व को बचाने में लगे हैं। इनका एकमात्र एजेंडा है, देश में वैक्यूम खड़ा करना है। स्टेट, गवर्नेंस, संविधान और सिक्योरिटी का वैक्यूम खड़ा कर रक्तपात करना ही उनका उद्देश्य है जो अब सफल नहीं होगा। श्री शाह ने कहा कि नक्सलियों ने कई सारे भोले-भाले ग्रामीणों को एनिमी इन्फॉर्मर बताकर फांसी पर चढ़ा दिया। इन्होंने जनता अदालत के नाम से एक दिखावा किया जहां न कोई वकील है, न जज है, वे स्वयं बैठे हैं, स्वयं फैसले करते हैं और फांसी देते हैं।

 

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलियों ने ना जनता ना सरकार के नाम से एक भ्रांति खड़ी की और विकास योजनाओं को रोकने का काम किया। इन्हें संविधान और न्याय व्यवस्था को निशाना बनाकर संविधान का वैक्यूम खड़ा करना था। जो लोग अब कह रहे हैं बातचीत करो, उनको पता होना ताहिए कि मैं 50 बार सार्वजनिक मंचों पर बस्तर में जाकर कह चुका हूं कि हथियार डाल दीजिए, सरकार आपके पूरे पुनर्वास की व्यवस्था करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की पॉलिसी है, चर्चा उसी से होती है जो हथियार डालता है, लेकिन जो गोली चलाता है, उसको जवाब गोली से ही दिया जाता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि जैसे ही रूस में साम्यवादियों की सरकार का गठन हुआ, यहां पर 1925 में सीपीआई की स्थापना हुई। जब रूस में कम्युनिस्टों की सरकार बनी, उसी वक्त यहां सीपीआई की स्थापना हुई। इसके बीच में कोई रिलेशनशिप है क्या? रूस की सरकार ने स्पॉन्सर कर दुनियाभर में कम्युनिस्ट पार्टी की रचना की। अब जिस पार्टी की नींव ही किसी दूसरे देश की प्रेरणा से की गई है, वो हमारे देश का भला कैसे सोचेगी? इन्होंने तो अंग्रेजों का भी समर्थन किया था। 1964 में कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सिस्ट बनी, ये भी समझने की बात है कि सीपीआईएम क्यों बना? यह भी समझना पड़ेगा कि जब सीपीआई थी, तो फिर सीपीआईएम क्यों बनी? 1964 में सोवियत रूस और चीन के बीच झगड़ा हुआ तो दोनों साम्यवादी राष्ट्र के अंदर अलग-अलग विचारधारा की साम्यवादी सरकारें आई। जैसे ही अलग-अलग विचारधारा की सरकारें आई, तो यहां पर चीन की एक समर्थित पार्टी सीपीआई मार्क्सिस्ट बना दी। इसके बाद 1969 में संसदीय राजनीति का विरोध करने के लिए सीपीआई एमएल मार्क्सिस्ट की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य विकास का वैक्यूम बनाना या अधिकारों की रक्षा नहीं था बल्कि उसके संविधान में उद्देश्य था संसदीय राजनीति का विरोध कर सशस्त्र क्रांति करना।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इन्होंने सशस्त्र क्रांति और संसदीय राजनीति का विरोध करने के दो उद्देश्यों के साथ सीपीआई मार्क्सिस्ट बनाई और यही आज के माओइस्ट हैं। उसके बाद 1975 में जैसे ही कांग्रेस का समर्थन मिला, एमसीसी माओइस्ट बनी और बिहार झारखंड केंद्रीय पार्टी बनी। फिर पीडब्ल्यूजी 1980 में बना। वह आंध्र केंद्रित बना। 1982 में दलित किसान केंद्रीय सशस्त्र संघर्ष सीपीआई एमएल पार्टी यूनिटी बिहार में बनी। दलित किसान केंद्रीय संघर्ष उनका उद्देश्य था। 1998 में पीपल्स वॉर ग्रुप बना और उसमें माओवादियों का एकत्रीकरण हुआ। इतना सब करने के बाद भी वह सफल नहीं हुए और 2000 में पीएलजीए बना, गुरिल्ला फोर्स बनाई और 2004 में ये पीडब्ल्यूजी एमसीसी का विलय हो गया। 2014 में मोदी जी आए और 2026 में सब की समाप्ति हो गई। ये 1925 से लेकर 2026 तक 101 साल का उनका इतिहास है। इसे अन्याय के खिलाफ संघर्ष का स्वरूप मानकर महिमामंडित मत करो। ये लोग वोट की जगह बुलेट से शासन प्राप्त करना चाहते हैं। कुछ लोग चर्चा से मानते नहीं है, वहां बल प्रयोग कर उनके अत्याचार से निर्दोष नागरिकों को बचाना पड़ता है। ये हमारी पार्टी की सरकार है और हर नागरिक की सुरक्षा नरेन्द्र मोदी जी ने सुनिश्चित की है। जो भी नागरिकों के साथ अन्याय करेगा, समझा तो ठीक है वरना ये फोर्स इसी के लिए बनाई गई है। इसका उपयोग भी होगा, परिणाम भी आएगा और आज आ भी गया है

श्री अमित शाह ने कहा कि अर्बन नक्सली कहते हैं कि हथियार उठाकर घूमने वाले माओवादियों के साथ चर्चा करो क्योंकि वो अन्याय के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें मारना नहीं चाहिए और इनके प्रति सिंपैथी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक भी बुद्धिजीवी दिव्यांग बनने वाले किसान, 5000 से ज्यादा सिक्योरिटी फोर्सेज के जवानों, उनकी विधवाओं के लिए नहीं है, इनके अनाथ बच्चों के लिए नहीं लिखता। उन्होंने कहा कि इनकी मानवता संविधान तोड़कर हथियार लेकर घूमने वालों के लिए ही है। इनके हथियारों से जो नागरिक मारे जा रहे हैं, इनके लिए आपकी मानवता नहीं है। मानवता के दोहरे चरित्र को स्वीकार नहीं कर सकते, यह मानवतावादी नहीं हैं, बल्कि नक्सलियों के समर्थक हैं। ये लोग गरीबों के हाथ में हथियार देकर अपनी विचारधारा को फैलाना चाहते हैं, मगर उनके भी दिन लद गए हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सलवा जुडूम की शुरुआत 2005 में सरकार समर्थित जनआंदोलन के रूप में हुई। आदिवासी युवाओं को एसपीओ बनाया गया और उनको आतंक फैलाने वालों के सामने लड़ने के लिए ट्रेनिंग दी गई। सलवा जुडूम की शुरुआत श्रीमान कर्मा ने की थी जिन्हें नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया था। 5 जुलाई 2011 को सर्वोच्च अदालत ने नंदिनी सुंदर और अन्य लोगों ने एक विवाद दायर किया और सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस सुदर्शन रेड्डी के नेतृत्व में तय किया कि नक्सलियों के खिलाफ राज्य की ये लड़ाई गैरकानूनी है और तुरंत ही इनको हथियार वापस देने का ऑर्डर कर दिया। इसका परिणाम हुआ उनके हथियार वापस दिए गए और इन्होंने चुन-चुन कर सलवा जुडूम से जुड़े हुए लोगों को मार दिया और वही सुदर्शन रेड्डी विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बने। जो देश की कानून और व्यवस्था को मानते हैं, वो सुदर्शन रेड्डी को कभी अपना प्रत्याशी नहीं बनाते। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति जज बनकर अपनी व्यक्तिगत आइडियोलॉजी का उपयोग कर, संवैधानिक कपड़े पहनकर, अपनी आइडियोलॉजी को ऑर्डर में कन्वर्ट कर, हजारों बेगुनाह आदिवासियों की जान जाए ऐसा फैसला देता है, तो इस जजमेंट की घोर निंदा करते हैं। आइडियोलॉजी जनता के कल्याण से ऊपर नहीं है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में 2014 के बाद नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र में 17,589 किलोमीटर सड़कें बनाने की मंजूरी दी है, जिसमें 12,000 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं। विकास इसीलिए हो रहा है कि धीरे-धीरे-धीरे नक्सलवाद समाप्त हो रहा है। लगभग-लगभग 5,000 मोबाइल टावर, ₹6,000 करोड़ के खर्चे से हम लगा चुके हैं। दो अन्य योजनाओं में और 8,000 4G टावर बनाने का फैसला नरेन्द्र मोदी जी ने किया है। 1804 बैंक शाखाएं 12 साल में खुली हैं, 1321 एटीएम खुले हैं, 37,850 बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंस बनाए गए और 6025 डाकघर खुले। यह सब सिर्फ 12 साल में हुआ है। हमने माओवादियों के साथ चर्चा नहीं की, उन्हें समाप्त किया और विकास को आगे बढ़ाया। 259 एकलव्य आदर्श विद्यालय बनाए, इसके साथ-साथ 46 आईटीआई, 49 स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए, 16 कौशल विकास केंद्र बनाए और लगभग इस सबके लिए 800 करोड़ रुपए का खर्च 12 साल में हमने किया है। सिविक प्रोग्राम में 212 करोड़ के कार्य किए जो स्वास्थ्य शिविर और दवाओं से जुड़े हुए हैं और जनजाति युवा एक्सचेंज के कार्यक्रम भी हमने बनाए। सिक्योरिटी के लिए राज्यों की सहायता के लिए एसआरई लेकर आए जिसमें 10 साल में 3000 करोड़ दिया। स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम लेकर आए और इसमें 5000 करोड़ दिया। उन्होंने पूछा कि ये सब 1970 से अब तक क्यों नहीं हुआ था? पिछली सरकारें करने जाती थीं तो वो धमाके कर मार देते थे। हमने धमाके करने वालों को समाप्त किया, तो अब विकास हो रहा है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि 2014 के बाद क्लियर पॉलिसी और स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल विल इस काम में जुड़ी है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी जी ने ये स्पष्ट कर दिया इस देश के किसी भी कोने में चाहे कश्मीर हो, उत्तर पूर्व हो, या वामपंथी उग्रवादी प्रभावित क्षेत्र हो, गैरकानूनी प्रवृत्ति नहीं चलेगी और इस पर कठोर हाथों से काम होगा। केन्द्र और राज्यों के बीच में अलाइनमेंट हुआ। स्टेट की कैपेसिटी में गवर्नमेंट, गवर्नेंस और पुलिसिंग में हमने सुधार किया। सीएपीएफ और स्टेट पुलिस का समन्वय बढ़ाया। एक्शनेबल इंटेलिजेंस को नीचे तक परकोलेट करने की व्यवस्था की और जिम्मेदारियां भी स्पष्ट कर दी। ऑल एजेंसी अप्रोच शुरू किया और सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि एनआईए, ईडी, इंटेलिजेंस एजेंसी, जैसे सभी नेटवर्क, फंडिंग और सपोर्ट सिस्टम, पर हमने प्रहार किया। इफेक्टिव सरेंडर पॉलिसी लेकर आए। डेवलपमेंट और गवर्नेंस में हमने कोई वैक्यूम नहीं छोड़ा और अब पहले जहां राज्य की उपस्थिति नहीं थी, वहां आज राज्य की उपस्थिति है और नक्सलवाद की हार का सबसे बड़ा कारण यह है कि राज्य अब हर गांव में पहुंच चुका है, वहां पंचायत बन चुकी है। विकास के लिए हमने Whole of Government अप्रोच लिया और सुरक्षा नकेल कसने के लिए Whole of Agency अप्रोच लिया।

श्री अमित शाह ने कहा कि 20 अगस्त, 2019, 24 अगस्त 2024 और कल 31 मार्च 2026 की तीन महत्वपूर्ण तारीखों के बारे में बताना चाहूंगा। 20 अगस्त 2019 को गृह मंत्रालय में एक मीटिंग हुई और पूरा पुलिस कोऑर्डिनेशन, मॉडर्नाइजेशन, रिटायर्ड नक्सलियों को पुलिस फोर्स में लेना, इनका कोऑर्डिनेशन खुफिया एजेंसी के साथ, ये सब 20 अगस्त को डिजाइन किया। छत्तीसगढ़ में विपक्षी पार्टी की सरकार थी जिसने सहयोग नहीं दिया। बिहार 2024 के पहले नक्सलमुक्त हो चुका था, महाराष्ट्र एक तहसील छोड़कर 2024 के पहले नक्सल मुक्त हो चुका था। ओडिशा 2024 के पहले नक्सलमुक्त हो चुका था। झारखंड एक जिला छोड़कर 2024 के पहले नक्सलमुक्त हो चुका था। सिर्फ छत्तीसगढ़ बचा हुआ था क्योंकि छत्तीसगढ़ की विपक्षा पार्टी की सरकार ने नक्सलवादियों को बचा कर रखा था। जनवरी 2024 में छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार बनी और दूसरे ही दिन, वहां पूरे समर्थन का भरोसा मिल गया। साझा रणनीति बनी और 24 अगस्त 2024 को हमने घोषित किया था कि 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद पूरे देश से समाप्त कर देंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इसके बाद हमने सुरक्षा घेरे में बढ़ोतरी की। प्रधानमंत्री मोदी जी के 11 साल में 596 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बने। नक्सल प्रभावित जिले जो 2014 में 126 थे, आज सिर्फ दो बचे हैं। मोस्ट इफेक्टेड जिले 2014 में 35 थे, आज शून्य है। नक्सल घटनाएं दर्ज करने वाले पुलिस स्टेशन जो 350 थे, आज 60 हैं। पिछले 6 साल में 406 नए सीएपीएफ के कैंप बनाए, 68 नाइट लैंडिंग हेलीपैड बनाए, 400 बुलेट प्रूफ, ब्लास्ट प्रूफ गाड़ियां हमारे जवानों को दी गई, पांच अस्पताल हमारे जवानों के लिए बनाए गए और कम्युनिकेशन की सारी व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई।

श्री अमित शाह ने कहा कि 2024, 2025 और 2026 का संयुक्त आंकड़ा देखें तो तीन सालों में मारे गए नक्सली, 2026 के मार्च तक 706 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए। 2218 गिरफ्तार हुए, उनको पकड़कर हमने जेलों में डाला है, अदालतों की शरण में ले गए और 4839 लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष संवाद की बात करता है। शासन का यही अप्रोच होना चाहिए जो वार्ता करना चाहता है, उसके साथ वार्ता करनी चाहिए और जो हमारे जवानों, किसानों, आदिवासियों, बच्चों पर गोली चलाता है, उसका जवाब गोली से देना चाहिए। हमने संवाद, सुरक्षा और समन्वय तीनों का उपयोग किया है। नवीनतम टेक्नोलॉजी का उपयोग कर सटीक निगरानी और ढेर सारे टेलीफोन बिलों का विश्लेषण किया है। लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम, मोबाइल फोन की गतिविधियां, साइंटिफिक कॉल लॉग्स, सोशल मीडिया एनालिसिस, फॉरेंसिक और तकनीकी संस्थानों की सहायता लेकर इस पूरे अभियान का गृह मंत्रालय ने नेतृत्व किया है। ड्रोन सर्वेलेंस, सैटेलाइट उपयोग, इमेजिंग टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा एनालिसिस से ये सफलता प्राप्त हुई है।

बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में बिहार में 2022 में ऑपरेशन ऑक्टोपस चला। ऑपरेशन डबल बुल गुमला, लोहरदगा और लातेहार जिलों में चला 8 से 25 फरवरी, 2022 में, तीनों जिले नक्सलवाद से मुक्त हो गए। ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म झारखंड के सरायकेला, पश्चिमी सिंहभूम और खूंटी जिले में 1 से 3 सितंबर 2022 में चला। ऑपरेशन भीमबर्ग मुंगेर जिले के जून व जुलाई 2022 में चला। ऑपरेशन चक्रबांधा बिहार के गया और औरंगाबाद जिलों में 2022 में चला और ये सारे एरिया इससे मुक्त हो गए। ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा में 50 किलोमीटर लंबी और 37 किलोमीटर चौड़ी एक पहाड़ी पर चला। वहां पर नक्सलियों ने अपना एक परमानेंट कैंप बनाया था और वहां 5 साल लड़ सकने के लिए हथियार, सोलर लाइट की व्यवस्थाएं, ढेर सारी आईडी बनाने की फैक्ट्रियां और 5 साल का अनाज था। इसके अलावा 400 से 500 कैडर वहां पर एकत्रित थे। गृह मंत्री ने कहा कि 45 डिग्री टेंपरेचर पहाड़ पर पत्थर गर्म हो जाता था। शरीर में से 2 लीटर, 3 लीटर पसीना बह जाता था लेकिन जवानों ने उफ तक नहीं की और 21 दिन तक ऑपरेशन चला। 30 से ज्यादा माओवादी मारे गए, बाकी नीचे उतरते ही पुलिस के साथ मुठभेड़ों में मारे गए या सरेंडर कर दिया और यह पूरा असला हमने जब्त कर लिया। इसी ने महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मतलब बस्तर और तेलंगाना में माओवादी आंदोलन का अंत कर दिया। श्री शाह ने कहा कि कोबरा, सीआरपीएफ, डीआरजी और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों ने अमानवीय धैर्य के साथ इनके किले को तोड़ा है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सेंट्रल कमिटी मेंबर और पोलित ब्यूरो मेंबर 2024 की शुरुआत में कुल 21 थे, जो इनकी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व है। एक पकड़ा गया है, सात सरेंडर हुए हैं, 12 मारे गए हैं और एक फरार है, उसके साथ भी वार्ता चल रही है। 21 के 21 सेंट्रल कमिटी मेंबर और पोलित ब्यूरो मेंबर समाप्त हो चुके हैं और उनकी केंद्रीय व्यवस्था टूट चुकी है। दंडकारण्य में 27 की स्टेट कमेटी थी, तीन अरेस्ट हुए, 20 सरेंडर हुए, 11 मारे गए और दो से बातचीत जारी है। दंडकारण्य की उनकी मुख्य स्टेट कमेटी थी, वो समाप्त हो चुकी है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, एमएमसी स्टेट कमेटी, तीन सरेंडर कर गए, तीन की ही बची थी। ओडिशा, चार बचे थे, एक सरेंडर हुआ, तीन मारे गए। ओएससी, ओडिशा, पांच ने सरेंडर किया, पांच मारे गए, 10 ही थे। डिस्टर्ब रीजन ब्यूरो, अरेस्ट एक हुआ, तीन मारे गए, एक फरार है। तेलंगाना में छह सरेंडर हो गए, तीन मारे गए, एक भी नहीं बचा है तो उनकी पोलित ब्यूरो मेंबर और सीएमसी पूरा समाप्त हो चुका है। हमने लक्ष्य रखा था कि 31 मार्च को देश को नक्सलवाद मुक्त करेंगे और हम नक्सलमुक्त हो गए हैं, ऐसा कहने में अब कोई संकोच नहीं है। बसव राजू उनके महासचिव न्यूट्रलाइज हुए, हिड़मा जिन्होंने 27 लोगों को मारा था, गजुरल्ला रवि 11 वर्ष से एक्टिव थे, न्यूट्रलाइज हुए।कदारी सत्यनारायण रेड्डी 46 वर्ष से एक्टिव थे, न्यूट्रलाइज हुए। गणेश उइके 44 वर्ष से एक्टिव थे, न्यूट्रलाइज हुए। वेणुगोपाल आत्मसमर्पण किया। 46 वर्ष से एक्टिव थे। वासुदेव आत्मसमर्पण किया, 36 वर्ष से एक्टिव थे। पल्लूरी प्रसाद राव चंदना 46 वर्ष से एक्टिव थे, आत्मसमर्पण किया। रामदेव मांझी देबू 36 वर्ष से एक्टिव थे, समर्पण किया। टिपरी तिरुपति 44 वर्ष से एक्टिव थे, उन्होंने भी सरेंडर कर दिया है। सभी मुख्य हथियारी माओवादी समाप्त हो चुके हैं। हमने ल्यूक्रेटिव पुनर्वास पॉलिसी को अपनाया है, जिसमें आत्मसमर्पण की प्रोत्साहन राशि 50,000 घोषित की गई है, जो सामूहिक सरेंडर पर दोगुना कर देते हैं। मोबाइल सबको सरकार की ओर से देते हैं। हथियार जमा कराने पर और मुआवजा देते हैं। पुनर्वासन केंद्र पर कौशल प्रशिक्षण व टूल किट का वितरण करते हैं। ₹10,000 प्रति माह 36 माह तक हम उनको देते हैं। सभी को मोदी जी ने प्रधानमंत्री आवास योजना की गिफ्ट दी है। नक्सल मुक्त पंचायत होते ही गांव के विकास के लिए ₹1 करोड़ दिया जाता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों ने 15000 बच्चों का जीवन बर्बाद कर दिया इसका जिम्मेदार कौन है? उन्होंने कहा कि आप तो एसी चेंबर में बैठकर कोर्ट के प्रोटेक्शन के तहत आर्टिकल लिखते हैं और वहां जीवन के जीवन उजड़ गए हैं और किसी को परवाह नहीं है। उन्होंने कहा कि जो अपने आप को ह्यूमन राइट का चैंपियन मानते हैं उनसे पूछा जाए कि 32 साल की आयु तक मेहंदी ना लगाने वाली बच्ची के ह्यूमन राइट की कौन चिंता करेगा? उन्होंने कहा कि उसकी चिंता नरेन्द्र मोदी जी करेंगे और कोई नहीं। उन्होंने कहा कि इन लोगों का अधिकार छीन लिया है, इसका हिसाब कभी न कभी देना पड़ेगा। श्री शाह ने कहा कि जिन्होंने भी शब्द या प्रच्छन्न रूप से नक्सलियों का समर्थन किया है, वह सब इस पाप के उतने ही भागीदार हैं जितना बंदूक लेकर घूमने वाले हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इनकी नौकरी और रोजगार के लिए हमने ढेर सारे प्रयास किए हैं, कौशल केंद्र बनाए हैं। बारहवीं तक इनके बच्चों के लिए बारहवीं तक की मुक्त मुफ्त शिक्षा करी है। महिलाओं को 2 लाख और पुरुषों को 5 लाख के ऋण की व्यवस्था की है। वहां बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम के माध्यम से संस्कृति और खेल को बढ़ावा दे रहे हैं। वहां अब 1 लाख 20 हजार कलाकारों ने बस्तर पंडुम में भागीदारी की और 5 लाख 50 हजार आदिवासी खेले हैं। जो इसको न्याय की लड़ाई कहते हैं, वो बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक में जाएं। श्री शाह ने कहा कि पीड़ितों पर जुल्म ढाने वालों के लिए भाषण करने के लिए आपके पास बहुत समय है।

श्री अमित शाह ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी की सरकार बनी, तब एक नेशनल एडवाइजरी काउंसिलबनी थी। एक नई नेशनल एडवाइजरी काउंसिल एक्स्ट्रा कॉन्स्टिट्यूशनल फोरम खड़ा किया गया जो देश के कानून बनाता था। उन्होंने कहा कि हर्ष मंदर इसके सदस्य थे, जिनके एनजीओ अमन वेदिका में शीर्ष नक्सली नेता की पत्नी को जिम्मेदारी दी गई थी और रिकॉर्ड है कि वह उन नक्सलियों में शामिल थी जिन्होंने अपहरण के केस अर्बन एरिया में किए थे। उन्होंने कहा कि ये एनएससी देश का नीति निर्धारण करती थी। उन्होंने कहा कि रामदयाल मुंडा कहते थे कि नक्सल ऑपरेशन जरूरत से ज्यादा कठोर है। उन्होंने कहा कि इस प्रच्छन्न समर्थन ने ही नक्सलियों की हिम्मत बढ़ाई। उन्होंने कहा कि नंदिनी सुंदर, रामचंद्र गुहा, ई ए एस शर्मा, ये सारे लोग सलवा जुडूम के केस के साथ भी जुड़े थे। जब सरकार की एक एक्स्ट्रा कॉन्स्टिट्यूशनल अथॉरिटी, जो पीएम से भी ऊपर थी, उसके सदस्य अगर नक्सलवाद के समर्थक हों तो किस तरह से नक्सलियों का हौसला टूटेगा? कैसे टूटेगा? उन्होंने कहा कि यह मुख्य विपक्षी पार्टी ने किया था। ये तो इतिहास है और जो लोग इस बात का विरोध करते हैं, आने वाले दिनों में सैकड़ों पुस्तकें लिखी जाएगी जो आपके कारनामों से भरी हुई होगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलियों और उनके हमदर्दों के साथ देखे गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंटल संगठनों ने हिस्सा लिया, इसका रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि वे 2010 में ओडिशा में लाडो सिकोका के साथ मंच पर दिखे। सिकोका ने उसी मंच से भड़काऊ भाषण दिया और उन्हें माला भी पहनाई। उन्होंने कहा कि 2018 में हैदराबाद में गुम्मांडी विट्ठल राव उर्फ गद्दार से नेता प्रतिपक्ष ने मुलाकात की जो विचारधारा के करीब रहे। मई 2025 में कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ पीस के साथ मुलाकात की। आज जब 172 जवानों को मारने वाला हिडमा मारा गया तब इंडिया गेट पर नारे लगे, कितने हिडमा मारोगे? हर घर से निकलेंगे हिड़मा और इस वीडियो को नेता प्रतिपक्ष ने स्वयं शेयर किया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों के समर्थकों ने 1970 से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलवाद का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ये नरसंहार का समर्थन है और 20 हजार लोग जो मारे गए, इसका दोषी अगर कोई एक है तो मुख्य विपक्षी पार्टी की वामपंथी विचारधारा है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के साथ रहते-रहते, ये पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए हैं। उन्होंने कहा कि इसका जवाब इस देश की जनता को चुनाव में देना पड़ेगा क्योंकि ये बात यहां रुकेगी नहीं, बल्कि जनता की अदालत में जाएगी।


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