Press | Mar 28, 2026
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वाराकोलकाता, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की भ्रष्ट एवं निकम्मी सरकार के ख़िलाफचार्जशीट जारी करते हुए दिए गए संबोधन के मुख्य बिंदु
बंगाल में TMC के खिलाफ चार्जशीट जनता की चार्जशीट है।
ममताबनर्जी ने 77 समुदाय को OBC में जोड़ा, उसमें 75 मुस्लिम समुदाय हैं, धर्म के आधारपर OBC नहीं तय होगा।
बंगाल के लिए यह चुनाव TMC के भय को छोड़, भाजपा के भरोसेको अपनाकर देश की विकास यात्रा से जुड़ने का चुनाव है।
बंगाल में भाजपा ने 10 वर्षों में 10% से 38% वोट और 3 से 77 विधानसभा सीट की यात्रातय की है, जो स्पष्ट बताता है कि इस बार भाजपा सरकार बनेगी।
ममता दीदी, आपने वोट बैंक के लिए बॉर्डर पर फेंसिंग के लिएजमीन नहीं दी, भाजपा सरकार बनते ही बॉर्डर फेंसिंग पूरी होगी
बंगाल से कई इंडस्ट्री पलायन कर गए, लेकिन ममता बनर्जी कोकेवल घुसपैठियों के वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने की चिंता है।
ममता दीदी को जो भी आरोप लगाना है, लगा लें, हम एक एक घुसपैठियेको चुन-चुनकर बाहर करेंगे।
पश्चिम बंगाल में महिला CM होने के बावजूद प्रदेश में महिलाओंका हाल सबसे खराब है, R. G. Kar, संदेशखाली, दुर्गापुर सामूहिक बलात्कार की घटनाएंइसकी प्रमाण हैं।
पश्चिम बंगाल में 15 साल में जिन-जिन लोगों ने भी महिलाओंपर अत्याचार किए हैं, उन्हें पाताल से भी ढूंढकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।
ममता बनर्जी ने राशन घोटाला, शिक्षक भर्ती घोटाला, मनरेगाजॉब कार्ड घोटाला, मवेशी तस्करी जैसे घोटालों से बंगाल को घपलों-घोटालों का प्रदेशबना दिया।
देश में SIR कई जगह हुए, लेकिन सिर्फ बंगाल में ही जुडिसियलऑफिसर लगाने पड़े।
भाजपा के 300 कार्यकर्ताओं की हत्या, शुभेंदु अधिकारी जीऔर जे.पी. नड्डा जी पर हमला, TMC की चुनावी हार की हताशा है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज शनिवारको कोलकाता, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की भ्रष्ट एवं निकम्मी सरकार के 15 वर्षोंके कुशासन के ख़िलाफ़ चार्जशीट जारी किया। उन्होंने घुसपैठ, भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण,महिला असुरक्षा, राजनीतिक हिंसा और उद्योगों के पलायन को प्रमुख मुद्दा बताते हुए आरोपलगाया कि बंगाल में सिंडिकेट राज, कट-मनी और वोट बैंक की राजनीति हावी है। उन्होंनेविश्वास व्यक्त किया कि इस बार के विधानसभा चुनाव में बंगाल की जनता भय छोड़कर भाजपापर भरोसा दिखा कर “सोनार बांग्ला” के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगी।
श्री शाह ने कहा कि बंगाल में चुनाव की घोषणा हो चुकी हैऔर भारतीय जनता पार्टी के सभी कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में बंगाल मेंभारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए बड़े आत्मविश्वास के साथ चुनावी मैदान मेंउतरे हैं। पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता श्री सुवेंदु अधिकारी ने भी चुनाव से पहलेपूरे बंगाल का दौरा कर राज्य में फैली अव्यवस्थाओं, अराजकता और आर्थिक बदहाली तथा विशेषरूप से घुसपैठ के मुद्दे को बंगाल के जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया है। बंगालका यह चुनाव बंगाल के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, साथ ही पूरे देश के लिए भी महत्वपूर्णहै। पूरे देश की सुरक्षा एक प्रकार से बंगाल के चुनाव से जुड़ी हुई है। असम मेंभारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वहाँ से घुसपैठ कमोबेश समाप्त हो गई है औरअब एक ही रास्ता बचा है, जहाँ से घुसपैठ होकर घुसपैठिए पूरे देश में फैलते हैं तथादेश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करते हैं। इसलिए यह चुनाव बंगाल के लिए कई मायनों मेंमहत्वपूर्ण है और देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भाजपा ने यहतय किया है कि तृणमूल कांग्रेस के शासन के खिलाफ जनता के जो मुद्दे हैं, उन्हें आवाज़दी जाएगी, जनता की आवाज़ को मुखर करते हुए बंगाल और देश की जनता के सामने प्रस्तुतकिया जाएगा तथा तृणमूल के शासन में फैली अराजकता का समाधान और उसका स्पष्ट जवाब भीआने वाले चुनाव में प्रस्तुत किया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज की यह प्रेस वार्ता तृणमूलकांग्रेस की पंद्रह साल की सरकार के खिलाफ चार्जशीट प्रस्तुत करने के लिए है। भले हीतृणमूल कांग्रेस इसे भाजपा का चार्जशीट बताए, लेकिन यह वास्तव में बंगाल की जनता द्वाराममता बनर्जी की सरकार के खिलाफ लगाया गया चार्जशीट है, जिसे भाजपा आवाज़ दे रही है।आने वाला चुनाव इस बात को तय करेगा कि बंगाल की जनता भय को चुनती है या भरोसे को।भय के आतंक से मुक्ति पाकर जिस प्रकार देश भरोसे के साथ तेज़ी से आगे बढ़ रहा है,उसी के साथ बंगाल को भी जुड़ना चाहिए और यही इस चुनाव का निर्णयकारी प्रश्न है। पिछलेपंद्रह वर्षों में भय, भ्रष्टाचार और भेदभाव की राजनीति चली है और झूठ, डर तथा हिंसाके सहारे राजनीति को आगे बढ़ाने की एक नई राजनीतिक थ्योरी ममता बनर्जी ने प्रस्तुतकी है।
श्री शाह ने कहा कि किसी भी सरकार के चुने जाने का आधारजनकल्याण के कार्य होते हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने का आधार झूठ, डरऔर हिंसा रहा है। भारतीय जनता पार्टी वर्ष 2011 से ही इसके खिलाफ संघर्ष कर रहीहै और उन्हें विश्वास है कि इस बार बंगाल की जनता पूर्ण बहुमत के साथ भारतीय जनतापार्टी की सरकार बनाने जा रही है। यह चार्जशीट तृणमूल कांग्रेस के पंद्रह वर्षोंके काले चिट्ठों का संकलन है और सोनार बांग्ला का स्वप्न दिखाकर सिंडिकेट राज स्थापितकर जनता का शोषण करने वाले शासन की कहानी प्रस्तुत करती है। तृणमूल कांग्रेस केकुशासन में बंगाल भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन चुका है, जहाँ ऊपर से नीचे तक सफेदपोशआपराधिक सिंडिकेट जनता को परेशान कर रहे हैं। विकास के अभाव में बंगाल उद्योगों केलिए एक प्रकार से ग्रेवयार्ड बन गया है। बंगाल में घुसपैठियों को संरक्षण दियाजाता है और तुष्टिकरण सरकार का मिशन बन चुका है। भ्रष्टाचारी स्थापित रूप से राजनीतिकव्यवस्था में पहुँच चुके हैं, कट-मनी का कलेक्शन आम बात हो गई है और सिंडिकेट पर कोईकार्रवाई नहीं करना इस सरकार का स्वभाव बन गया है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्रीने कहा कि कई वर्षों तक कम्युनिस्ट शासन का दंश झेल चुकी बंगाल की जनता ने सोनार बांग्लाके स्वप्न के साथ परिवर्तन किया था। ममता बनर्जी के नेतृत्व में पंद्रह वर्षों तक ऐसाशासन बंगाल ने अनुभव किया है। बंगाल की जनता ने लगातार भारतीय जनता पार्टी का समर्थनकिया है और समय के साथ पार्टी का विस्तार हुआ है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीयजनता पार्टी का वोट शेयर 17 प्रतिशत था और दो सीटें मिली थीं, जबकि 2019 में यह बढ़कर41 प्रतिशत हो गया और 18 सीटें प्राप्त हुईं। 2024 में पार्टी का वोट शेयर 39 प्रतिशतरहा और 12 सीटें मिलीं, जिससे लगभग 40 प्रतिशत वोट शेयर का एक आधार तैयार हुआ है।2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 10 प्रतिशत वोट और केवल तीन सीटें मिली थीं,जबकि 2021 के चुनाव में यह बढ़कर 38 प्रतिशत तक पहुँचा और 77 सीटों के साथ विधायक दलका नेतृत्व श्री सुभेंदु अधिकारी कर रहे हैं।
श्री शाह ने कहा कि 30 वर्षों तक कांग्रेस और कम्युनिस्ट,इन दोनों पार्टियों ने यहाँ लंबे समय तक शासन किया, लेकिन इन्हें शून्य सीटें प्राप्तहुईं। 2024 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में महाराष्ट्र,हरियाणा, उड़ीसा, दिल्ली और बिहार सहित कई राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्वमें एनडीए ने अप्रत्याशित जीत हासिल की है। भारतीय जनता पार्टी के कैडर और कार्यकर्ताजन-जन तक पहुँचे हैं, जनता की आवाज़ को मुखर कर रहे हैं और इस बार बंगाल की जनता नेप्रचंड बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने का मन बना लिया है। यह चुनावएक प्रकार से भय से मुक्ति का चुनाव है। जान जाने के भय से मुक्ति, आज़ादी जाने केभय से मुक्ति। पूरे बंगाल का बहुमत समाज आर्टिफिशियल डेमोग्राफिक चेंज के कारणइस आशंका में जी रहा है कि कहीं अपने ही देश में वह अल्पसंख्यक न बन जाए। यह चुनावअपनी संपत्ति के लुटने के भय से मुक्ति का, रोज़गार छिनने के भय से मुक्ति का, महिलाओंकी सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरे से मुक्ति का और युवाओं के भविष्य पर छाए भय और अंधकारसे मुक्ति का चुनाव है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह चुनाव शांति के भरोसेका, सम्मानजनक जीवन की गारंटी का और गरीबों को मुफ्त इलाज मिलने के विश्वास का चुनावहै। यह चुनाव इस भरोसे का है कि पक्के घर का अधिकार सिंडिकेट न छीन सके, मुफ्त बिजलीहर गरीब तक पहुँचे और हर घर में नल से जल उपलब्ध हो। यह युवाओं के उज्ज्वल भविष्य औरघुसपैठियों से मुक्त एक बंगाली समाज के निर्माण के विश्वास का चुनाव है और यही भरोसाआज बंगाल के चुनाव का मुख्य मुद्दा बन गया है। भय को समाप्त कर भरोसे को स्थापित करनाही लक्ष्य है, जिसका अर्थ है तृणमूल कांग्रेस को हटाकर भारतीय जनता पार्टी का शासनस्थापित करना। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में विकासकी जो तेज़ रफ्तार चली है, उसके साथ बंगाल भी जुड़ना चाहता है। 2014 से अब तक देश मेंव्यापक परिवर्तन हुए हैं। 2016 में असम में भाजपा सरकार बनी, 2017 में मणिपुर, हरियाणाऔर अरुणाचल प्रदेश में, 2018 में त्रिपुरा में और 2024 में उड़ीसा में पहली बार भारतीयजनता पार्टी ने सरकार बनाई। 2026 में प्रचंड बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी बंगालमें भी सरकार बनाने जा रही है और यह उन्हें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
श्री शाह ने कहा कि बंगाल जीतने के साथ ही लंबे समय केबाद अंग, बंग और कलिंग, तीनों क्षेत्रों में एक ही पार्टी का शासन होने जा रहा है।बिहार में एनडीए का शासन है, उड़ीसा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और अब बंगालमें भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है, जिससे पूर्ण बहुमत की सरकार बंगालके विकास की गारंटी बनेगी। ममता बनर्जी ने हमेशा विक्टिम कार्ड की राजनीति की है।कभी पैर तुड़वाने, कभी सिर पर पट्टी बंधवाने, कभी बीमार होने और कभी चुनाव आयोग केसामने स्वयं को असहाय दिखाने के माध्यम से। बंगाल की जनता अब इस राजनीति कोभली-भांति समझ चुकी है और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर अपशब्द कहना बंगाल कीसंस्कृति के अनुरूप नहीं है। एसआईआर के मुद्दे पर भी स्पष्टता आवश्यक है और यहप्रक्रिया पूरे देश में हो रही है, लेकिन केवल बंगाल में ही न्यायिक अधिकारियों कीनियुक्ति की आवश्यकता पड़ी। तमिलनाडु और केरल में भी एसआईआर हुआ, जहाँ क्रमशः डीएमकेऔर कम्युनिस्टों की सरकार है, फिर भी वहाँ कोई न्यायालयी विवाद नहीं हुआ। बंगाल मेंऐसी क्या परिस्थिति बनी कि सर्वोच्च न्यायालय को न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करनीपड़ी, इसका उत्तर ममता बनर्जी को बंगाल की जनता के सामने देना चाहिए।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेटनिर्भीक रूप से कार्य नहीं कर पाए, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट को न्यायिक अधिकारियोंकी नियुक्ति करनी पड़ी। एसआईआर को लेकर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उस पर मैंबंगाल की जनता से पूछना चाहता हूं कि जिन घुसपैठियों को वोटर बनाकर रखा गया है, क्याउन्हें बंगाल का भविष्य तय करने का अधिकार दिया जाना चाहिए? यह निर्णय बंगालकी जनता को करना है। भारतीय जनता पार्टी का संकल्प केवल वोटर सूची तक सीमितनहीं है, बल्कि देशभर से प्रत्येक घुसपैठिये को चिह्नित कर देश के बाहर निकालना पार्टीके एजेंडे का हिस्सा है। ममता बनर्जी आरोप लगाती रहें, लेकिन डबल इंजन सरकार केकई उदाहरण सामने हैं। उत्तर प्रदेश ‘बीमारू’ से ‘बेमिसाल’ बना है, मध्य प्रदेश ने कृषिऔर समग्र विकास के नए मानक स्थापित किए हैं, असम में जहाँ वर्षों तक उग्रवाद था, वहाँआज सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित हो रहा है और त्रिपुरा ने 25 वर्षों के ठहराव और कैडरराज को समाप्त कर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का कार्य किया है। अब बारी बंगाल कीहै और यह चुनाव सिंडिकेट से मुक्ति प्राप्त कर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का चुनावहै।
श्री शाह ने कहा कि मैं चार्जशीट के कुछ महत्वपूर्ण मुद्दोंपर प्रकाश डालना चाहता हूँ। इसमें घुसपैठ की समस्या को विस्तार से उजागर किया गया है।घुसपैठिये न केवल देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती हैं, बल्कि वे गरीब श्रमिकोंकी मज़दूरी में हिस्सेदारी लेते हैं, गरीबों के अनाज पर भी प्रभाव डालते हैं और युवाओंकी रोज़गार के अवसर छीनते हैं। ममता बनर्जी जवाब दे कि इतनी बड़ी संख्या में घुसपैठियेआने के बावजूद क्या उनकी सरकार निष्क्रिय क्यों है? इस पर अक्सर बीएसएफ की भूमिकापर सवाल उठाए जाते हैं, जबकि बीएसएफ तभी प्रभावी ढंग से रोकथाम कर सकती है जब राज्यसरकार सीमा पर बाड़ लगाने के लिए भूमि उपलब्ध कराए। लगभग 600 किलोमीटर तक बाड़अधूरी रह गई है और इस विषय में गृह सचिव सहित स्वयं उन्होंने भी बंगाल सरकार से संपर्ककर भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, लेकिन इसके बावजूद भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई।इसका कारण घुसपैठियों को वोट बैंक के रूप में बनाए रखने की मंशा है। केंद्र सरकारने इस विषय में किसी प्रकार का राजनीतिक अहंकार नहीं रखा और संवाद तथा पत्राचार केमाध्यम से लगातार प्रयास किए, लेकिन सहयोग नहीं मिला। ममता बनर्जी के पास अब अधिकसमय नहीं है और 6 मई को भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद 45 दिनों के भीतरबाड़ निर्माण के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई जाएगी तथा घुसपैठ पर प्रभावी रोक लगाईजाएगी।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि ममता बनर्जीने तुष्टिकरण की राजनीति को चरम पर पहुँचा दिया है। हम बंगाल की जनता को बतानाचाहते हैं कि पिछले बजट में अल्पसंख्यकों के लिए ममता बनर्जी की सरकार द्वारा5,713 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। मैं इसका विरोध नहीं कर रहा हूँ लेकिनइसके अनुपात में पिछड़ा वर्ग की संख्या तीन गुना होने के बावजूद तृणमूल सरकार द्वाराओबीसी के लिए मात्र 2,533 करोड़ रुपये का बजट रखा गया। कम संख्या होने पर भी अल्पसंख्यकोंको अधिक बजट और अधिक संख्या होने पर भी पिछड़े वर्ग को कम बजट दिया जाना एक महत्वपूर्णतथ्य है, जिसे जनता को जानना चाहिए। ममता बनर्जी सरकार ने 77 समुदायों को ओबीसीमें शामिल किया, जिनमें से 75 समुदाय मुस्लिम थे। क्या अन्य कोई ओबीसी वर्ग नहीं है?धर्म के आधार पर ओबीसी का निर्धारण लंबे समय तक नहीं चल सकता। घुसपैठ की राजनीतिके कारण सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा कमजोर हुई है और मवेशी तस्करी तथा नकली मुद्राके प्रसार से देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है। तुष्टिकरण की राजनीति केचलते बंगाल गंभीर समस्याओं से घिर चुका है।
श्री शाह ने कहा कि बंगाल की मुख्यमंत्री स्वयं महिलाहैं, लेकिन उनके शासन में महिलाओं की स्थिति पूरे देश में सबसे खराब हो गई है।ममता बनर्जी की सरकार में महिलाओं अत्याचार के खिलाफ 34,738 मामले दर्ज किए गए औरतृणमूल कांग्रेस के कैडर द्वारा महिलाओं पर होने वाले अपराधों में खुलेआम संरक्षण दियागया। आरजी कर मामले में आरोपियों के वकीलों को राज्यसभा भेजकर पुरस्कृत करनेका प्रायस किया गया। संदेशखाली में आदिवासी महिलाओं के शोषण के मामले भी सामने आए,जिनमें तृणमूल कांग्रेस के पदाधिकारी शामिल थे। लॉ कॉलेज बलात्कार मामले में चुप्पीसाध ली गई, पार्क स्ट्रीट मामले को ममता बनर्जी ने मनगढ़ंत बताया, हंसखाली मामले मेंटीएमसी नेता के पुत्र पर आरोप लगे तो पीड़िता के चरित्र पर ही सवाल उठाए गए। कामदुनीसामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में न्याय की मांग करने वाली महिलाओं को माओवादीबताया गया और दुर्गापुर मेडिकल छात्रा के मामले में भी महिलाओं पर ही सवाल खड़े किएगए। तृणमूल कांग्रेस के शासन में अनेक घोटाले सामने आए हैं, जिनमें शिक्षक भर्तीघोटाला, जिसमें 26,000 नौकरियां रद्द हुईं, मनरेगा जॉब कार्ड घोटाला, प्रधानमंत्रीआवास योजना घोटाला, मिड-डे मील घोटाला, पीएमजीएसवाई सड़क घोटाला, मालदा बाल राहत घोटाला,अफान राहत घोटाला और मवेशी तस्करी घोटाला शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद,विधायक और पदाधिकारी इन घोटालों में जेल में हैं, फिर भी उन्हें टिकट दिया गया है।क्या ममता बनर्जी इन सभी मामलों का जवाब बंगाल की जनता को दे पाएंगी?
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्रीने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के शासन में कानून और व्यवस्था का पूर्णतः पतन हो चुका है।बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार में 300 से अधिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं, विशेषकरभारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। विपक्ष के नेता सुवेंदुअधिकारी पर पश्चिम मेदिनीपुर में हमला किया गया और भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्षश्री जगत प्रकाश नड्डा की गाड़ी पर भी हमला हुआ। ममता बनर्जी ने बंगाल में राजनीतिकहिंसा को चुनाव जीतने का पर्याय बना दिया है। बंगाली अस्मिता पर भी अनेक प्रकार केहमले हुए हैं। संसद में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर हुई गौरवमयी चर्चा कातृणमूल कांग्रेस ने विरोध किया। बांग्ला पाठ्यपुस्तकों में उर्दू शब्द शामिल किए गए,खुदीराम बोस के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया और सनातन धर्म के लिए ‘गंदाधर्म’ जैसे शब्दों का उपयोग किया गया। हरिचंद और गुरुचंद ठाकुर के पवित्र नामोंका भी अपमान किया गया। वर्तमान स्थिति में बंगाल, कविगुरु के आदर्शों वाला बंगाल नहींरह गया है और ममता बनर्जी के शासन में बंगाली अस्मिता का स्तर अत्यंत नीचे चला गयाहै।
श्री शाह ने कहा कि आज बंगालको एक औद्योगिक कब्रिस्तान के रूप में जाना जा रहा है, जहाँ से अनेक उद्योग पलायन करगए, लेकिन इस पर ममता बनर्जी ने कोई चिंता नहीं जताई। उन्हें उद्योगों के जानेसे अधिक इस बात की चिंता रही कि घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में बने रहें। यदि उतनीही चिंता उद्योगों के लिए की गई होती, तो इतने बड़े पैमाने पर उद्योग बंगाल नहीं छोड़ते।एफडीआई का प्रवाह 30 प्रतिशत गिरकर केवल 2,662 करोड़ रुपये रह गया है, जो इतने बड़ेराज्य के लिए अत्यंत कम है, जहाँ से 40 लोकसभा सीटें आती हैं। ‘माँ, माटी, मानुष’के नारे के साथ सत्ता में आई ममता बनर्जी की सरकार ने उसी नारे के साथ विश्वासघात कियाहै। पूरी तृणमूल कांग्रेस और उसका कैडर ‘कट-मनी’ और सिंडिकेट में व्यस्त रहा है, जबकिजनता परेशान है और बदलाव की मांग कर रही है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी के नेतृत्व में बंगाल की जनता इस बार भारी बहुमत से भारतीय जनता पार्टी को चुनकरसरकार बनाएगी। आज की प्रेस वार्ता के माध्यम से मैं बंगाल की जनता से आग्रह करनाचाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी का जो घोषणा पत्र आएगा, उसमें इस आरोप पत्र में जिनकारणों से बंगाल नीचे गया है, उनका समाधान प्रस्तुत किया जाएगा। कविगुरु की कल्पनाके अनुरूप सोनार बांग्ला बनाने के लिए पार्टी का एक्शन प्लान, रोडमैप और कार्ययोजनाभी घोषणा पत्र में शामिल होगी। श्री शाह ने पुनः बंगाल की जनता से अपील की कि भय कोत्यागकर अपने अधिकारों के लिए आगे आएँ, भारी संख्या में मतदान करें और तृणमूल कांग्रेसकी सरकार को मूल समेत उखाड़कर हटाएँ।